ग्रेटर नोएडा
ग्रेटर नोएडा वेस्ट में विभिन्न आरोपों को झेल रही रियल एस्टेट कंपनी आम्रपाली के बारे में एक और चौंकाने वाली बात सामने आई है। आम्रपाली ने मात्र एक रुपये में भी फ्लैट बेचे हैं। कुछ लोगों को फ्री में फ्लैट दिए गए। आम्रपाली जैसी स्थिति से बचने के लिए ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी अब नियमों में बदलाव करने की तैयारी में है। इसके तहत आवंटित प्लॉट के अविकसित हिस्से का आवंटन रद्द करने और सरेंडर करने का नियम बनाने की योजना बनाई जा रही है। इस तरह पार्ट कैंसिलेशन से परियोजना में फंसे बायर्स और अथॉरिटी दोनों को फायदा हो सकेगा।

42 हजार होम बायर्स परेशान
ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी का आम्रपाली पर करीब 3 हजार करोड़ रुपये बकाया है। नोएडा-ग्रेटर नोएडा में आम्रपाली के करीब 42 हजार बायर्स घर की आस में भटक रहे हैं। केस सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है। अथॉरिटी ने अपनी तरफ से 48 बिल्डरों की परियोजनाओं का ऑडिट कराया था। सूत्रों के अनुसार पता चला है कि आम्रपाली ने कुछ लोगों को मात्र एक रुपये में भी फ्लैट बेचे थे। कई लोगों को फ्री में भी फ्लैट दिए गए। इनमें कई प्रभावशाली लोग बताए गए हैं।

104 बिल्डरों पर लगभग 6 हजार करोड़ बकाया
ग्रेनो अथॉरिटी पर आम्रपाली समेत 104 बिल्डरों पर 6 हजार करोड़ रुपये बकाया है। काफी ऐसे बिल्डर हैं, जिन्होंने आवंटित जमीन के कुछ हिस्से पर ही निर्माण और बुकिंग की है। ऐसे हिस्से को वापस लेकर अथॉरिटी बकाया वसूल सकती है, लेकिन इसका नियम अभी नहीं है। साथ ही अगर उस हिस्से में भी बिल्डर ने हवा में ही बुकिंग कर ली हो तो ऐसे बायर्स को भी अथॉरिटी जमीन वापस लेने के बाद रिफंड कर सकेगी।

सरेंडर होगी जमीन
लिहाजा ऑडिट समिति ने अथॉरिटी की तरफ से आवंटन रद्द करने और बिल्डर की ओर से सरेंडर के नियमों में बदलाव करने की भी बात कही गई है। अभी पूरा प्लॉट ही सरेंडर या रद्द कर सकते हैं। अब प्लॉट के ऐसे हिस्से को सरेंडर या रद्द करने की तैयारी है, जिस पर बिल्डर ने निर्माण नहीं किया है। पार्ट में सरेंडर और आवंटन रद्द करने का नियम बनाने के लिए अथॉरिटी अपने बोर्ड में प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रही है। सीईओ नरेंद्र भूषण ने पुष्टि की है कि ऑडिट कमिटी ने पार्ट सरेंडर एवं पार्ट में आवंटन रद्द करने की बात की है।

Source : Agency