भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को अभी तक आपने बाहुबली, राजनीति का आधुनिक चाणक्य, आदर्श नेता आदि संबोधनों से जाना है लेकिन मप्र में वे तोता बन गए हैं! तोता इस परिप्रेक्ष्य में कि शाह मप्र सरकार की योजनाओं की इतनी तारीफ कर रहे हैं कि उन्हें कोई बुराई ही नजर नहीं आती। ऐसा लगता है मानो शाह अब शिवराज के रंग में रंग गए हैं। हो भी क्यों न, जब कोई खामी नहीं निकाल पाए तो तारीफ तो करना ही पड़ेगा। विकास कार्यों के मामले में रिकॉर्ड खुद ही बोलता है। लिहाजा अमित शाह दूसरे दिन मप्र सरकार की भाषा ही बोलने लगे हैं। उन्होंने एक सवाल के जवाब में यहां तक कह दिया कि वे शिवराज को 100 में से 100 नंबर देते हैं। कल तक मंत्रियों, विधायक, सांसदों की खिंचाई करने वाले अमित शाह जब शनिवार को मीडिया से रूबरू हुए तो पूरी तरह से बदले हुए नजर आए। चेहरे पर न तो तमतमाहट थी और न ही गरममिजाजी। बल्कि वे पत्रकारों से हंसी-मजाक और ठिठोलियां करते हुए सवालों का जवाब देते नजर आए। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की तारीफों के उन्होंने इतने पुल बांधे कि बगल में बैठे शिवराज अब निश्चिंत हो गए और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमारसिंह चौहान भी। कई बार अमित शाह ने शिवराज की प्रशंसा करते हुए कहा कि आज मप्र विकास के मामले में कई राज्यों से आगे खड़ा है।
 
उन्होंने दोहराया कि शिवराज के नेतृत्व में ही विकास की यात्रा बहेगी। पत्रकार इस कोशिश में थे कि वे अपने सवालों से अमित शाह का माथा ठनकाएंगे, लेकिन हुआ उल्टा। शाह ने पत्रकारों की होशियारी का पानी निकाल दिया। वे यह कई बार कहते नजर आए कि लेवल का सवाल पूछिए। मप्र में पत्रकारिता की पहचान चुटीली मानी जाती है, लेकिन आश्चर्य है कि मीडिया के सवाल या तो किसी नेता की खुशामद के लिए होते हैं या फिर यह जताने के लिए होते हैं कि उनसे बड़ा ज्ञानी कोई और नहीं है। इस चक्कर में वे सवाल छूट जाते हैं जिन्हें वाकई जनता सुनना चाहती है। मीडिया के कुछ पत्रकारों ने अच्छे सवालों से भी अमित शाह का ध्यान अपनी तरफ खींचा, लेकिन अधिकांश सवाल निरर्थक और स्तरीय नहीं लगे। एक दौर वह था जब भोपाली पत्रकारों का सामना करने से पहले नेता अच्छी तरह से तैयारी करके बैठते थे। पत्रकारों के सवाल नेताओं का पसीना छुड़ा देते थे। मगर अब पहले वाली बात नजर नहीं आ रही है। अमित शाह को किसी ने हजारो करोड़ रुपए के अवैध उत्खनन शायद ही दी हो। नर्मदा सहित प्रदेश की नदियां किस कदर खोखली हो गई उसके तटबंधों को छलनी कर डाला गया। फिर भी शाह सरकारी तोता बनकर मीडिया का मनोरंजन करते रहे। पत्रकारों के सवाल उन्हें चुटकुले लगने लगे हैं। शाह का अहंकार यह बताता है कि सत्ता की ताकत क्या चीज होती है।

Source : विजय शुक्ला