सावधान, कल प्रधानमंत्री मोदी यदि टीवी चैनल पर आकर अचानक पेट्रोल-डीजल वाली गाड़ियों को बंद करने का ऐलान कर दें तो तो हैरान-परेशान मत होईएगा। बेसिर पैर वाले ऐसे निर्णय मोदी राज में आगे भी होते रहेंगे।  दरअसल, सरकार 3 साल बाद आज भी यह नहीं समझ पाई है कि सरकार और देश को चलाना कैसे है? एक ही डंडे से दोनों को हांका जा रहा है। अमीर है,  या मध्यम वर्ग या धन कुबेर। उपलब्धियों का बखान और कीर्तिमान रचने के चक्कर में जनता बेमतलब पिस रही है। नोटबंदी को लेकर आरबीआई द्वारा जारी की गई रिपोर्ट ने मोदी और उनकी सरकार के तोते उड़ा दिा है। रिपोर्ट पर पहली सफाई वित्त मंत्री अरुण जेटली की आई और जब पलड़ा कमजोर पड़ा तो सरकार ने अपने सभी केंद्रीय मंत्रियों, सांसदों, मुख्यमंत्रियों को एक ही टास्क दे दिया है कि इतना जोर-जोर से चिल्लाओ कि आरबीआई की रिपोर्ट को जनता झूठा मान ले।  अपने पिट्ठू और भोपू भांठ टीवी चैनलों और अखबारों को साफ हिदायत दे दी गई है कि चाहे जो करना पड़े, नोटबंदी को हमारे सररकार की सबसे बड़ी उपलब्धि बताने का तमाशा तेज करो। चापलूस-चाटुकार मीडिया तो पहले से ही लगा हुआ है कि वह मोदी सरकार की नजर में नबंर वन बना रहे।
आजकल तो ऐसा हो गया है कि मंत्रियों को बयान भी नहीं देने पड़ते, पत्रकार पहले ही जवाब लिख मारते हैं। आरबीआई ने नोटबंदी की रात 8 नवंबर 2016 को ही कह दिया है कि यह हमारा निर्णय नहीं है। सरकार सीना ताने नोटबंदी को एतिहासिक क्रांतिकारी निर्णय बताने की जिद किए बैठी रही। उसकी इस अंधी-सनकपन मिजाजी ने देशभर में 34 लोगों की जिंदगियां छीन ली। जिस प्रकार इंदिरा गांधी के राज में नसबंदी कलंक बनीं ठीक उसी प्रकार मोदी सरकार की नोटबंदी स्वतंत्र भारत में लिया गया सबसे मूर्खतापूर्ण फैसला है। नोटबंदी आजाद भारत का सबसे बड़ा घोटाला है! प्रधानमंत्री ने कहा था मुझे 50 दिन दे दीजिए और उसके बाद चाहें तो जिंदा जला देना। एक प्रधानमंत्री का भाषाई स्तर इतना नीचे गिर सकता है? फिर भी बेवकूफ जनता ने झांसे में आकर चुपचाप नोटबंदी का जुल्मों सितम सहन किया। याद कीजिए भरी संसद में मोदी ने यूपीए सरकार की महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना को कांग्रेस की विफलता का धरोहर बताकर पार्टी सांसदों से मेजें खूब बजवाई थीं। अब यही नोटबंदी मोदी सरकार की बैंड बजाने वाली साबित होगी। सवाल उठता है कि किसे फायदा पहुंचाने के लिए देश की जनता पर नोटबंदी का जुल्म ढाया गया? आजाद भारत में नोटबंदी मोदी सरकार की सबसे बड़ी विपुलता का स्मारक कही जाएगी। मीडिया को जूतों की नोक पर रखने का दंभ भरने वाली केन्द्र सरकार को बचने का रास्ता नहीं मिलेगा। नोटबंदी भविष्य में भाजपा सरकार की महाभूल के लिए याद की जाएगी। प्रचंड बहुमत वाली केन्द्र सरकार को अभी से इस बात की चिंता सताने लगी है कि 2019 के आम चुनाव को कैसे जीता जाए। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की चले तो देशभर की एवीएम मशीनों को बोरे में भरकर गुजरात ले जाएं। मगर ईमानदार निष्पक्ष और पारदर्शिता की नई मिसाल कायम करने वाले निर्वाचन आयोग के होते ऐसा हो नहीं पाएगा। नोटबंदी की तरह देशभर में जन-धन खाते खुलवाने का निर्णय भी केन्द्र सरकार की सनक मिजाजी का उदाहरण कहा जाएगा।