पिछले चौदह साल से मध्यप्रदेश की सत्ता पर राज कर रही भाजपा सरकार की पेशानी पर नौकरशाहों की सुस्त चाल ने चिंता की लकीरें खींच दी हैं। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान राज्य की कमान शानदार ढंग से संभाले चल रहे हैं,मगर सरकार को चलाने वाले दो बड़े पाए कमजोर हो गए हैं। या यूं कहें कि इन पायों की वजह से सरकार की जनता के बीच इनदिनों जमकर किरकिरी हो रही। मुख्यमंत्री जिस सिस्टम में कसावट लाने की भरसक कोशिशें कई महीने से करते आ रहे हैं, उसे कार्यान्वित करने में दो अफसरों की भूमिका सबसे खास होती है। इनमें पहले हैं राज्य के मुख्य सचिव बसंत प्रताप सिंह और दूसरें हैं पुलिस महकमें के महानिदेशक ऋषिकुमार शुक्ला। पिछले कुछ महीनों से दोनो ही प्रमुख अफसरों की हालत पतली है। मुख्य सचिव की हालत उन्हीं के अंडर में कार्य करने वाले राधेश्याम जुलानिया,विवेक अग्रवाल,अशोक वर्णवाल जैसे कुछ महान प्रजाति के नामी सीनियर आईएएस अफसरों के कारण पतली है तो हेड कांस्टेबल से लेकर पुलिस अधीक्षकों की मनमौजी के चलते महकमें की जनता में भद कुट रही है। आप जानते हैं ऐसा क्यों हो रहा है? क्योंकि जनता के प्रति जवाबदेही को लेकर पूरा सिस्टम लुल्ल पड़ चुका है? बिना ठोस कार्ययोजना के ही मुख्यमंत्री से नंबर बंटोरने के लालच में किसानों को फायदा पहुंचाने के नाम पर भावांतर जैसी योजना अचानक शुरू कर दी जाती है। जिसकी खामियों के लिए मुख्यमंत्री को सब जगह सफाई देनी पड़ रही है। कृषि विभाग के प्रमुख सचिव राजेश राजोरा एक काबिल अफसर समझे जाते हैं मगर भावांतर योजना में किसान जिस तरह अपनी उपार्जित फसलों की रकम प्राप्त करने के लिए परेशान हो रहा है,उससे राजौरा की नामसमझी साफ दिख रही है। करीब साल भर में राज्य विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। सरकार चुनावी मोड पर आ चुकी है। यह जानते हुए मुख्यमंत्री को अफसर गुमराह करने में लगे हुए हैं। इंकम टैक्स विभाग से पहले चर्चा कर भुगतान की दिक्कतों का समाधान कर लिया जाता तो मुख्यमंत्री को रेडियो पर बार-बार किसान भाईयों से अपील नहीं करनी पड़ती। मुख्यसचिव और पुलिस महानिदेशक की पकड़ और भय अपने अधीनस्थ अमले पर यदि होने लगे तो सिस्टम मजाल है कि ढीला हो। मगर अफसोस दोनो ही प्रमुख पाए अभी तक अपना-अपना प्रभाव जनता में नहीं छोड़ सके? भाजपा राज के पिछले दो पंचवर्षीय कार्यकाल कितने फर्राटेदार और उपलब्धियों से भरे रहे मगर वर्तमान तीसरा कार्यकाल सरकार की चुनौतियों पर चुनौतियां बढ़ा रहा है। इसका दोष सिस्टम और उसे चलाने वाले जिम्मेदार प्रमुख अफसरों को जाता है। थानों पर हवलदार दारोगा की नहीं सुनता। पुलिस अमला विधायक-मंत्रियों की चापलूसी करने में मगन है। जनता मरे चाहे जिए उसे कोई फर्क नहीं पड़ता। भोपाल में एक युवती के साथ हुई गैंगरेप की घटना हमारे सिस्टम के गाल पर तमाचा नहीं बल्कि जूते मारने वाली है। पुलिस को ही पुलिस से इंसाफ नहीं मिला तो हमें क्या खाक मिलेगा? मीडिया में थू-थू होने लगी तो सिस्टम की नींद टूटी और मुख्यमंत्री को तीन थानों के टीआई सस्पेंड और सीएसपी-आईजी हटाने पड़े। नए एसपी और आईजी बिठाने से क्या ऐसी वारदातों पर लगाम लगेगी? मैं कहता हूं हरगिज नहीं। जब तक महकमें के लोग अपने उत्तरदायित्वों के प्रति नैतिक रूप से ईमानदार नहीं हो जाते गैंगरेप की घटनाएं होती रहेंगी। थाने का इंस्पेक्टर एक ढाबे वाले को फंसाने के लिए उसकी दुकान पर अपने स्टाफ से दारू की बोतलें रखवाने की कोशिश करता है। अफसरों की नाक के नीचे लेन-देन का पूरा खेल फल-फूल रहा है। ईमानदारी घास चरने चली गई। अरे, इन शर्मनाक घटनाओं से हमारे प्रदेश का सिर तो नीचे होता है। सिस्टम में कसावट लानी है तो केवल छोटे अफसरों को सजा देने से काम नहीं चलेगा। बड़े जिम्मेदार अफसरों को भी हटाना पड़ेगा। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की जनप्रियता कमाल की है मगर एक प्रशासक के रूप में उन्हें अपनी पहचान बनाने के लिए कुछ सख्त निर्णय लेने चाहिए। गैंगरेप की घटना ने हर घर में अपनी बेटियों को लेकर माओं को भयभीत कर दिया है। रात तो छोडि़ए दिन में भी माता-पिता बेटी को अकेले घर से निकलने में डरने लगे हैं। जुआरियों को पकडऩे गए पुलिस जवान को गोली मार दी जाती है। मंदसौर में किसानों की पुलिस की गोलियों से हत्या की घटना कदापि नहीं घटती,यदि मुख्यमंत्री अपने दिल की सुनकर आंदोलन में जाकर खड़े हो जाते। यह कैसा भयमुक्त प्रदेश बना रहे हैं शिवराज जी? भोपाल की पॉश इलाके की सड़कें हों या कोई गली चौराहे, देशी नस्ल के कुत्ते खुलेआम हमारी बहन-बेटियों को छेड़ रहे हैं। दुस्कर्म हो रहे हैं। इन मनचले,आवारा कुत्तों को कुचलने की जरूरत है। गैंगरेप मामले में डीजीपी का मीडिया में आया कथन शर्मिंदगी भरा है,लेकिन उन्हें छोड़ दिया गया ? यदि दस दिनों के लिए उन्हें घर बिठा देते तो पूरे महकमें की रूह कांप उठती। विधायक-मंत्री चुनाव का हवाला देकर भ्रष्ट-बेईमान अफसरों की सिफारिश करेंगे तो मुख्यसचिव क्या करेंगे। मुख्यमंत्री जी,जनता ने आप पर भरोसा कर तीसरी बार सत्ता सिंघासन सौंपा है,इसलिए उसे सिर्फ आपसे मतलब है। पुलिस के आला अफसरों को बता दीजिए कि यदि वे मीडिया के सवालों के जवाब रात नौ बजे नहीं दे सकते तो किसी कंपनी में सीईओ बन जाएं,मलाईदार कुर्सी केवल साहबगीरी के मजे लूटने के लिए नहीं है। शिवराज जी सिस्टम को लेकर जनता में अंसतोष पनपने लगा है। इसे समय रहते ठीक कर लीजिए।