नर्मदा परिक्रमा के दरमियान ग्राम जैत में एक बार बस यूं ही मैने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की धर्मपरायण पत्नी श्रीमती साधना सिंह से सहज भाव में एक सवाल पूछा था,जिसका जवाब इतना शानदार था कि देश की हर नारी श्रीमती साधना सिंह को उनकी हाजिर जवाबी के लिए दाद दिए बिना नहीं रह पाएगी। मेरा सवाल था कि यदि शिवराज मप्र के मुख्यमंत्री नहीं होते तो क्या होते? उन्होने कहा-एक अच्छे इंसान...। बात आई और गई हो गई। मगर आज उस प्रसंग से श्रीमती साधना सिंह के जवाब की गहराई का पता चला। उनका जवाब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बेदाग और शानदार व्यक्तित्व की विजय का भेद है,जिसे उनके विरोधी बारह वर्षों में नहीं समझ सके। इंसान अच्छा हो,तो  पूरी दुनिया उसकी दुश्मन चाहे क्यों न हो जाए मगर प्रकृति उसे पराजित नहीं होने देती। ऐसा करिश्मा मुख्यमंत्री के रूप में आज अपने 12 वर्ष पूर्ण कर चुके शिवराज सिंह चौहान के रूप में दुनिया देखकर अचंभित है। इंसानियत सबसे ऊपर है और इसी इंसानियत अर्थात मानवता के गुण ने शिवराज सिंह चौहान को इस मुकाम पर पहुंचाया है। उन्होने कपट,कुटिलता ,अहंकार और सियासी कुरीतियों को अपने पास कभी भटकने तक नहीं दिया। बहुत छोटे से ग्राम जैत में एक साधारण परिवार में जन्मे शिवराज को प्रकृति ने जिस मुकाम पर पहुंचाया है उसके पीछे उनका अटूट परिश्रम और जनता के प्रति सच्ची निष्ठा का होना है। उनके भीतर साहस,शालीनता और नेतृत्वशीलता के गुण जन्मजात हैं। मुख्यमंत्री के रूप में शिवराज सिंह चौहान ने मप्र को विकसित राज्य बनाने में दिन-रात परिश्रम किया। जननी सुरक्षा,लाड़ली लक्ष्मी,कन्यादान,जननी प्रसव,तीर्थ दर्शन,युवा उद्यमी जैसी योजनाएं चलाकर उन्होने भाजपा शासित नहीं बलिक अन्य सरकारों को सत्ता के सामाजिक दायित्व का मार्ग दिखाया। शिवराज ने इन बारह वर्षों में जनता की भलाई के लिए और सरकार की योजनाओं का वास्तविक लाभ पहुंचाने के लिए बहुत सारे अभियान और कार्यक्रम चलाए, जिनके कारण उनकी लोकप्रियता बढ़ती ही चली गई। किसानों के लिए शुरू की गई भावांतर भुगतान योजना एक विशेष प्रयास है। उन्होने हर वर्ग की भलाई के लिए समय-समय पर पंचायतें बुलाईं। रेडिया ,वीडियो कान्फें्रसिंग के माध्यम से लोगों से सीधा संवाद स्थापित किया। संविदा शाला शिक्षकों की भर्ती में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण एवं शासकीय सेवाओं में 33 प्रतिशत पद आरक्षित कर शिवराज ने महिला सशक्तीकरण के लिए जो कदम बढ़ाए हैं वह मील का पत्थर हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हों या कोई केंद्रीय मंत्री,जब भी उन्हें भाजपा राज की गाथा जनता को गिनानी पड़ती है तो वे मप्र की तारीफ किए बिना नहीं रह पाते। वस्तुत: मप्र में सरकार ने शिवराज सिंह चौहान की लीडरशिप में विकास के जितनी तेजी से कार्य किए हैं उसे कांगे्रसी राज्यों के मुख्यमंत्री भी मानते हैं। शिवराज की सफलता की कहानी संघर्ष से अछूती नहीं है। उन पर आरापों की बौछार लगी लेकिन उन्होने अपना धैर्य एवं विनम्र स्वभाव कभी नहीं छोड़ा। परिणाम स्वरूप उनकी सदैव जय होती गई। मप्र को कांगे्रसी शासनकाल में नेताओं ने अंधेरे की जिस खाई और विनाश के जिस दलदल में गिराया था,शिवराज ने उसे ऊपर उठाकर विकसित,आत्मनिर्भर और शक्तिशाली राज्य बनाया है। मप्र की जनता के दिलों पर वे राज करते हैं। वास्तव में जनता उनकी सारथी है,जो उनके अश्वमेधी अजेय रथ को खींच रही है। और शिवराज उस जनता को भगवान मानकर उसकी साधना में रत हैं। 
एक छोटा सा अवसर किसी व्यक्ति को महान बना देता है। ऐसे ही एक अवसर की परिणित हैं मप्र के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान। उमा भारती के राजनीतिक तांडव के कारण बाबूलाल गौर का मुख्यमंत्री पद नहीं जाता तो जिन शिवराज को हम इतने बड़े स्वरूप में देख रहे हैं,नहीं देख पाते। लेकिन नियति और विधान दोनो को अवसर ने सिद्ध कर दिखाया। वर्ष 2005 में आज की तारीख में एक साधारण किसान परिवार का बेटा अचानक राज्य का मुख्यमंत्री बना दिया गया। बस,इस अवसर को उन्होने अपने हाथ से आज तक जाने नहीं दिया। जनता के प्रति सेवा का अटूट संकल्प लेकर शिवराज सिंह चौहान ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। केवल एक ही प्रण लेकर दिन-रात अथक परिश्रम करना आरंभ किया कि मप्र को एक दिन विकसित राज्यों की श्रेणी में देश का अग्रणी राज्य बनाकर ही रहूंगा। शिवराज जो ठान लेते हैं उसे पूरा किए बिना चैन से नहीं बैठते। उनका यह सपना अब साकार हो चुका है। मप्र आज देश का अग्रणी राज्य बनकर राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतराष्ट्रीय क्षितिज पर शान से चमक रहा है। अगले साल राज्य में विधानसभा चुनाव की एक और बड़ी अग्निपरीक्षा शिवराज के सामने है,और उम्मीद है कि उनके नेतृत्व में मप्र आगे भी चमकता रहेगा। शिवराज के स्वभाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरह आक्रामता नहीं है,इसलिए अल्पसंख्यकों को उनकी छवि खासतौर से भाती है। वे एक पैदायिशी नायक हैं। इसलिए देर भले सही मगर एक दिन राष्ट्रनायक बनना सुनिश्चित है।