राज्य सभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांगे्रस सांसद रेणुका चौधरी को लेकर जिस तरह का घटनाक्रम देश की जनता ने देखा उसे किसी भी नजरिए से अच्छा तो नहीं कहा जा सकता। रेणुका चौधरी की हंसी की तुलना रामायणकाल से कर मोदी ने जो पलटवार किया उससे कांगे्रस तिलमिलाई हुई है। कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव एवं मप्र के प्रभारी प्रभारी दीपक बावरिया ने प्रधानमंत्री के आचरण को अंससदीय और अमर्यादित ठहराते हुए कड़ी आलोचना की। तो साथ ही अगले साल मप्र में होने जा रहे विधानसभा चुनाव को लेकर कांगे्रस की तैयारियों पर भी प्रकाश डाला। बावरिया ने साफ कर दिया है कि अबकी बार विधानसभा चुनाव लडऩे वाले उम्मीदवारों के नामों की घोषणा में विलंब नहीं होगा। उन्होने मुख्यमंत्री प्रोजेक्ट करने के सवाल से इंकार भी नहीं किया। प्रदेश प्रभारी के तौर पर पिछले चार-पांच महीनों से कार्य कर रहे बावरिया संगठन में नई जान फूं कने की कडी कोशिशों में लगे हुए हैं। 14 साल बाद पहली बार कांग्रेस पार्टी ने अपने चरमाए संगठन और बूथ कार्यकर्ताओं की सुध ली है। यह सब बावरिया के सौम्य बर्ताव और उनकी सूझबूझ का नतीजा है कि पार्टी के सभी बड़े नेताओं के बीच बेहतर तालमेल बना पाने में सफल साबित हो रहे हैं। प्रदेश भर के आम कार्यकर्ता उनके प्रभारी बनने से खुश हैं। बावरिया ने गुजरात की राजनीति की है और इसीलिए मप्र में शिवराज सरकार के खिलाफ उनके तेवर काफी सख्त हैं। उन्होने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी दो कदम आगे बढ़कर बड़ा कलाकर बताते हुए कहा कि वे जुमलों के सौदागर हैं। कांगे्रस की सांगठनिक एवं चुनावी तैयारियों को लेकर पेश है दीपक बावरिया की विजय मत से बातचीत के मुख्य अंश-
सवाल-राज्यसभा सदन में बीते रोज प्रधानमंत्री के भाषण के दौरान जो कुछ घटनाक्रम घटा उसके बारे में आप क्या कहेंगे?
जवाब-प्रधानमंत्री ने महिला सांसद की रामायणकाल से जिस परिप्रेक्ष्य में तुलना की, वह कहीं से सभ्य और संस्कार परिलक्षित नहीं करते। प्रधानमंत्री ने अपनी गरिमा का ख्याल न रखते पूरी नारी जाति का अपमान किया है। लोकसभा में कांगे्रस पार्टी प्रधानमंत्री से जिन सवालों के जवाब चाहती है, उनके पास नहीं हैं, इसीलिए मोदी प्रहसन करके जनता का ध्यान भ्रमित करना चाह रहे हैं। मगर हम ऐसा होने नहीं देंगे। उन्हें जवाब तो देना पड़ेगा। प्रधानमंत्री को अपने पद की गरिमा का ध्यान रखना चाहिए।
सवाल- संसदीय परंपरा की एक ओर आ लोग दुहाई देते हैं वहीं दूसरी ओर प्रधानमंत्री के भाषण पर पूरे समय नारेबाजी होती है,इसे भी तो संसदीय आचरण नहीं कहा जा सकता?
जवाब-देखिए, शुरूआत उन्होने की। सदन को गंभीरता से चलाने की जवाबदारी सत्तापक्ष की होती है। विपक्ष जनता से जुड़े मुद्दों पर प्रधानमंत्री से जब भी सवाल करता है,उनके मंत्री-सांसद वातावरण को अगंभीर बना देते हैं। रफेल डील पर कांगे्रस अध्यक्ष एवं सांसद राहुल गांधी जी के सवालों का सीधा जवाब प्रधानमंत्री क्यों नहीं दे देते? आखिर क्या दिक्कत है। देश ने आपको जनादेश दिया ,आपको उसका सम्मान करना चाहिए। चार साल में विकास की कितनी इबारतें लिंखीं। कितने बेरोजगारों को रोजगार दिए? महंगाई कब कम करेंगे? इनके जवाब मांगो तो प्रधानमंत्री नाराज हो जाते हैं।
सवाल-मप्र में आपको बहुत अधिक समय तो नहीं हुआ फिर भी कांगे्रस को चुनावी मुकाबले कि लिहाज से कहां खड़ा पाते हैं?
जवाब-मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि कांगे्रस का कार्यकर्ता गांव-गांव बड़ी संख्या में पार्टी के प्रति समर्पित होकर कार्य कर रहे हैं। उऊर्जा भाजपा सरकार को इस बार सत्ता से उखाड़ फेंकेगी। हम चुनाव के लिए तैयार हैं।
सवाल- कार्यकर्ता वाली बात चलें मान लेते हैं तो आपकी पार्टी के बड़े नेता कब एक होकर कार्य करेंगे ?
जवाब-यह सब भाजपा द्वारा फैलाया जा रहा भ्रम है कि नेता एकजुट नहीं है। या फिर गुटबाजी है। ऐसी ही भ्रम की हवा भाजपा ने गुजरात में फैलाने की बहुत कोशिश करनी चाही पर चल नहीं पाई। आपके माध्यम से मप्र की जनता को मैं यह विश्वास दिलाना चाहता हूं कि सभी बड़े नेता एकजुट हैं और भाजपा सरकार की विदाई इस बार सुनिश्चित है।
सवाल-विधानसभा चुनाव में टिकटों को लेकर दिल्ली हाईकमान निर्णय करने में बहुत देरी लगाता है। उम्मीदवारों की यही शिकायत रहती है कि उन्हें चुनाव लडऩे की तैयारी का पर्याप्त समय नहीं मिल पाता। क्या इस पर कोई प्रयास आप करेंगे?
जवाब-लंबे समय से जहां हम चुनाव हारते आए हैं,ऐसी सीटों के लिए हमारी रणनीति भिन्न होगी। और स्थितियों को देखते हुए उम्मीदवारों के नाम फाइनल होंगे। मगर हमारी पूरी कोशिश होगी कि अप्रैल से लेकर मई अंत तक संभावित उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कर दें।
सवाल- पार्टी मुख्यमंत्री पद प्रोजेक्ट करेगी और कब तक ?
जवाब- यह हमारी पार्टी का आंतरिक मामला है,इसलिए इस बारे में मीडिया के मित्रों से कोई बात नहीं करूंगा। समय आने दीजिए आप लोगों को सब पता चल जाएगा। हमारे लिए जो भी उपयुक्त होगा निर्णय लेंगे।
सवाल-13 साल से राज्य के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से आपका सामना है,इसे कितनी बड़ी चुनौती मानते हैं?
जवाब- प्रदेश की जनता मुख्यमंत्री के जुमलों से त्रस्त है। हर मोर्चे पर सरकार विफल रही है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान तो मोदी से एक कदम आगे कलाकर हैं। उनकी कोई विश्वसनीयता नहीं है। वे जुमलों के सौदागर हैं।