शिवराज के दौरे को लेकर जिले की मांग ने पकड़ा जोर, घर-घर अनशन

विजय मत ब्यूरो, ब्यौहारी
विंध्य क्षेत्र का सबसे पुराना राजनीतिक गढ़ ब्यौहारी इिनदनों बारिश के मौसम में भी खासा गर्म है। इसे मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के दौरे ने खासा गर्म बना दिया है। शिवराज एक सितंबर को ब्यौहारी में जनआशीर्वाद यात्रा के तहत जनसभा को संबोधित करेंगे। उनके आगमन की तैयारियों के कारण ब्यौहारी की बदहाल सड़कों के गढ्ढों को पाट दिया गया है। सत्तर साल पुरारी तहसील ब्यौहारी को जिले का दर्जा देने की मांग को लेकर यहां की जनता पहली बार इतनी लामंबद नजर आ रही है। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और मीसाबंदी एकस्वर में ब्यौहारी को जिला बनाने की आवाज बुलंद किए हुए हैं। मप्र की राजनीति में ब्यौहारी का दबदबा दशकों तक रहा है। वर्तमान में यह सीट कांगे्रस के कब्जे में है। और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के पास अवसर है कि वे चाहें तो ब्यौहारी को जिले का दर्जा देकर जनता का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।

ब्यौहारी को जिला बनाए जाने के आंदोलन का असर जयसिंहनगर, धौहनी, जैतपुर, बाधवगढ़, ताला समेत छ: विधानसभा क्षेत्रों के परिणामों पर पड़ सकता हैं। जहां भाजपा का कब्जा है। पूरे शहर में ब्यौहारी को जिला बनाए जाने के नारों वाले होर्डिंग्स पोस्टर लगाए गए हैं। स्कूली-कालेजी छात्र, महिलाएं और प्रत्येक नागरिक की शिवराज मामा से एक ही उम्मीद है कि वे अबकी बार ब्यौहारी को उसका हक जरूर देंगे। ब्यौहारी में जारी जिला बनाओ आंदोलन के चुनावी असर का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इससे घबराकर ही जयसिंहनगर सीट से भाजपा विधायक प्रमिला सिंह ने पार्टी नेतृत्व से कह दिया है कि वे ब्यौहारी से चुनाव नहीं लड़ेंगी। क्योंकि जिला बनाने का आंदोलन उन्हें चुनाव हरा देगा। इसी बीच सीधी जिले के मझौली क्षेत्र की जनता ने मझौली और कुसमी को ब्यौहारी से जोड़कर नया जिला बनाए जाने की मांग छेड़कर खुला समर्थन दिया है। मीसाबंदी गदाधर सिंह ने मुुख्यमंत्री को पत्र भी लिखकर कहा है कि मझौली और कुसमी ब्यौहारी से नजदीक हैं इसलिए इन क्षेत्रों को सीधी जिले से अलग कर ब्यौहारी से जोडऩे से विकास को गति मिलेगी। आपको बता दें कि कुछ दिन पहले टीकमगढ़ के चंदला को प्रदेश के 52वें जिले का दर्जा मुख्यमंत्री दे चुके हैं।

जनता में आक्रोश है। उसके गर्माहट की मुख्य वजह इस क्षेत्र का अति पिछड़ापन है। सत्तर साल पुरानी इस तहसील को न तो किसी सरकार ने नगर पालिका का दर्जा दिया ना ही इसे जिला बनाकर विकास की मुख्यधारा से जोड़ा गया। इसी बात को लेकर यहां की जनता के आक्रोश का लावा अचानक फूट पड़ा है। ब्यौहारी विधानसभा क्षेत्र का अस्तित्व भारत की आजादी के समय से है और अंग्रेजों के शासन में यहां का रक्त स्वतंत्रता के लिए कई बार बहा लेकिन आजादी के बाद 1952 से लेकर 2013 के विधानसभा चुनावों ने ब्यौहारी को पिछड़ेपन से आजादी नहीं दिलाई। यहां अधिकांश समय तक कांगे्रस का इकतरफा साम्राज्य स्थापित रहा लेकिन नब्बे के दशक में जनसंघ और बाद की भारतीय जनता पार्टी का कमल यहां खिला। बैजनाथ सिंह, पंडित रामकिशोर शुक्ल, दादाभाई लवकेश सिंह और रामगोपाल गुप्त जैसे ओजस्वी और प्रखर नेतृत्व यहां की माटी की देन रहे।

कांगे्रस के पंडित रामकिशोर शुक्ल यहां से सर्वाधिक बार विधानसभा चुनाव जीते, मंत्री भी रहे। बाद में लवकेश सिंह को जनता ने विकास की आस के साथ चुनकर विधायक बनाया। जनता ने यह बदलाव इसलिए किया था कि काश विकास को लेकर जो सपना वह देख रही है वह पूरा हो। इस क्षेत्र के विकास के लिए यहां के तमाम बड़े नेताओं ने कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी लेकिन सत्ता का अपेक्षित सहयोग न मिल पाने के कारण ब्यौहारी को उसका अधिकार आज तक नहीं मिला। इसी अधिकार को पाने की लड़ाई ब्यौहारी की युवा पीढ़ी ने छेड़कर जनमानस में आशा की एक नई किरण जगा दी है। जनता को लगने लगा है कि जो काम पंडित रविशंकर शुक्ल, श्यामाचरण शुक्ल, मोतीलाल बोरा,डीपी मिश्र, वीरेंद्र सखलेचा, अर्जुन सिंह, सुंदरलाल पटवा, दिग्विजय सिंह, उमा भारती आदि मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल में न हो सका, उसे वर्तमान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अवश्य पूरा करेंगे।

अंग्रेजों के जमाने से लेकर भारत की आजादी मिलने का दौर ब्यौहारी ने देखा है। आजादी के लिए यहां के सपूतों ने अपने प्राण न्यौछावर किए तो आपातकाल में इंदिरा सरकार के खिलाफ विद्रोह कर आज के मीसाबंदी कहलाने वाले कई लोग जेल भी गए। ब्यौहारी क्षेत्र की तहसील करीब सत्तर साल पुरानी है। शिवराज सरकार ने पंद्रह सालों में मप्र को पिछड़ेपन से आजादी दिलाने का इतिहास रचा लेकिन सत्तर सालों में ब्यौहारी के माथे से पिछड़ेपन का कलंक न मिट सका। इस बात से  एक साल से अनवरत यहां की जनता ब्यौहारी को जिला बनने का सपना देखकर आंदोलन कर रही है। कांगे्रस विधायक रामपाल सिंह इस मुद्दे के सहारे दूसरी बार चुनाव जीतने की सोच रहे हैं।

Source : विजय मत