भाजपा को कमलनाथ ने दिया बड़ा झटका लेकिन सिंधिया, दिग्विजय और अजय आहत
 विजय मत भोपाल।

मप्र की चुनावी राजनीति में शनिवार को एक और नया अचरझपूर्ण मोड़ तब आया जब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की पत्नी श्रीमती साधना सिंह के सगे भाई संजय सिंह कांग्रेस में शामिल हो गए। नई दिल्ली से पहले यह खबर आई कि दोपहर डेढ़ बजे विधानसभा प्रत्याशियों की सूची प्रेस आ रही है। लेकिन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ, चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष ज्योतिरादित्य सिंधिया एवं प्रदेश प्रभारी दीपक बावरिया ने जब संजय सिंह को अपने साथ लेकर कांग्रेस मुख्यालय दिल्ली में पत्रकारों के समक्ष हाजिर हुए तो माहौल गरमा गया। कमलनाथ ने संजय सिंह के कांग्रेस में शामिल होने की जानकारी मीडिया को दी। उसके बाद संजय ने अपने जीजा शिवराज सिंह चौहान पर कुछ जले बुझे आरोप दागे और अंत कहा मप्र को शिवराज नहीं नाथ की जरूरत है। उन्होने यह भी कहा कि वे शिवराज के परिवार से नहीं हैं बल्कि रिश्तेदार हैं,जिसका गोत्र अलग है। संजय सिंह को कांग्रेस में लाकर कमलनाथ ने मुख्यमंत्री एंव उनके परिवार को जोरदार झटका दिया है। लेकिन साथ ही उनके कांगे्रस में आने से लोगों के मन में कई सारे सवाल खड़े हो गए हैं। भारतीय जनता पार्टी पिछले दिनों 177 सीटों पर प्रत्याशियों के नामों की घोषणा कर चुकी हैं लेकिन कांग्रेस का पूरा जोर फिलहाल सूची जारी करने से अधिक भाजपा के भीतर तोड़-फोड़ करने पर है। कल ही कांग्रेस के पूर्व सांसद प्रेमचंद गुड्डू को भाजपा ने अपने पाले में खड़ा कर कांग्रेस को झटका दिया। लेकिन कांगे्रस ने मुख्यमंत्री के घर के अंदर ही घुसकर उनके अजीज साले को अपने साथ मिला लिया। गौरतलब है कि संजय सिंह मसानी पिछले कई वर्षों से कांगे्रस के निशाने पर रहे हैं। नीलाक्ष इन्फ्राट्रक्चर कंपनी के कर्ताधाता होने के साथ ही खनन करोबार से उनके नाम को विपक्ष जोड़कर आरोप लगाता रहा है। नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने सड़क से लेकर विधानसभा सदन के अंदर संजय सिंह पर फर्जी दस्तावेजों के सहारे ठेकेदार के रूप में पंजीय कराने के आरोप लगाए थे। संजय को कांग्रेस में लाए जाने से पार्टी के कई नेता खासकर दिग्विजय सिंह, ज्योतिरादित्य सिंधिया एवं अजय सिंह शायद ही खुश हों क्योकि जिस व्यापमं कांड, खदानमाफिया राज और डम्फर कांड जैसे मुद्दों पर वे शिवराज सरकार एवं उनके परिवार पर गंभीर आरोप लगाकर हमले किया करते थे, अब नहीं कर पाएंगे। बताते हैं कि संजय बालाघाट की बारासिवनी सीट से विधानसभा की टिकट मांग रहे थे, लेकिन पार्टी अध्यक्ष अमित शाह की मनाही के कारण बात न बन सकी। कांग्रेस के कुछ नेता उन्हें जीजा अर्थात मुख्यमंत्री के खिलाफ चुनाव लड़ाना चाहते हैं लेकिन चूंकि बुदनी से आर्य का नाम लगभग तय हो गया है,इसलिए बारासिवनी की अधिक संभावना है।