विदिशा कलेक्टर के साथ कुपोषण मुक्त करने उठे सैकड़ों हाथ
संजीवनी पोषण अभियान से बदल रही विदिशा की सूरत
विजय मत,भोपाल।
कुपोषण के खिलाफ विदिशा जिले ने आर-पार की लड़ाई तेज कर दी है। वह भी जनभागीदारी के माध्यम से। जिसे स्थानीय जनों का भारी समर्थन एवं आर्थिक सहयोग भी मिल रहा है। अच्छी बात ये कि यहां के समाजसेवी, बुद्विजीवी,व्यवसायी लोगों ने स्वयं से आगे आकर बच्चों के लिए 45 लाख रुपये इकट्ठा किये। और बच्चों की जिम्मेदारी ली। कलेक्टर अंशुल गुप्ता की एक सार्थक पहल ने देखते ही देखते आंदोलन का रूप धारण कर लिया है। कहा जा सकता है कि विदिशा कुपोषण मुक्ति की ओर बढ़ चला है। कलेक्टर ने जिले के 1538 अति कुपोषित बच्चों को चिन्हित कराते हुए आंगनवाड़ी केन्द्रों को पोषण संजीवनी अभियान से जुड़कर कार्य करने में सहयोग मांगा। महिला बाल विकास विभाग ने घर घर जाकर इन अति कुपोषित बच्चों को पोषण किट वितरित करने का कार्यक्रम चला रखा है। इस किट में एक रेसिपी बुक भी माताओं को दी जा रही है जिसमे बच्चे को क्या देना है। इसका विवरण दिया गया है। जनभागीदारी से शुरू हुए इस अभिनव प्रयासों का असर यह हुआ कि हर माह बच्चों का वजन बढ़ने लगा। उनके चेहरों पर मुस्कान देखी जा रही है। जनभागीदारी के माध्यम से पोषण किट वितरित की जा रही है। विदिशा के समाजसेवी कलेक्टर के इस अभियान की सराहना कर रहे हैं। माएं जिला प्रशासन को दिल से धन्यवाद दे रहीं हैं। वे कह रहीं है कि उन्हें लग रहा था कुपोषण उनके बच्चों को निगल लेगा मगर संजीवनी पोषण अभियान उनके जीवन मे अमृत के समान है। जिला प्रशासन के इस अभियान से सकारात्मक बदलाव आने लगा है। कहा जा रहा है कि बहुत जल्द कुपोषण के दानव का विदिशा जिले में सफाया हो जाएगा। यदि वास्तव में ऐसा हुआ तो किसी भी कलेक्टर द्वारा शुरू किया गया प्रयास सभी जिलों के लिए प्रेरणा बनेगा।
जनभागीदारी से जुटाए 45 लाख रुपये-
विदिशा कलेक्टर अंशुल गुप्ता की इस सार्थक पहल को जबरदस्त जनसमर्थन मिला। शहर के बुद्धिजीवी, समाजसेवी, व्यापारियों ने आगे आकर 1500 बच्चों के पोषण किट के लिए 45 लाख रुपए जुटाए। इतना ही नहीं बच्चों की नियमित रूप से निगरानी का जिम्मा भी उठाया। अति कुपोषित एक बच्चे पर तीन हजार रुपए पोषण किट तैयार कराई गई। कुपोषण के खिलाफ सामाजिक क्रांति आ गई है।
इनका कहना
विदिशा दानदाताओं का जनक रहा है। यहां के लोगों ने जिला प्रशासन के साथ मिलकर कुपोषण से मुक्ति का संकल्प लिया। सामाजिक सह्रदयता की वजह से अभियान को ताकत मिली। विश्वास है 3 से 6 महीने में बच्चे कुपोषण मुक्त हो जाएंगे। पहले चरण में 1500 अति कुपोषित बच्चों को जोड़ा गया है।
अगला चरण शुरू भी करेंगे।
अंशुल गुप्ता
कलेक्टर
विदिशा
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