बरसी महादेव मंदिर: महाभारत कालीन इतिहास और शिवरात्रि पर विशाल मेला
सहारनपुर : महाशिवरात्रि का पर्व पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाता है. इस अवसर पर शिव मंदिरों की सजावट भी खास होती है. आज हम आपको एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसकी कहानी महाभारत काल से जुड़ी हुई है. यह मंदिर न केवल ऐतिहासिक है, बल्कि यहां की एक अनोखी परंपरा भी है.
बरसी महादेव मंदिर, उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिला मुख्यालय से करीब 40 किलोमीटर दूर बरसी गांव में स्थित है. यह मंदिर महाभारत कालीन माना जाता है और यहां हर शिवरात्रि पर एक विशाल मेला लगता है. लाखों श्रद्धालु यहां आकर महादेव का जलाभिषेक करते हैं और उनकी पूजा करते हैं. इस मंदिर का इतिहास बहुत ही दिलचस्प है. बताया जाता है कि इस मंदिर का निर्माण महाभारत काल में दुर्योधन ने कराया था
अनोखे स्थापत्य के लिए प्रसिद्ध
एक रात, जब दुर्योधन सो रहे थे, तब भीम ने अपनी गदा से इस मंदिर के मुख्य द्वार को घुमा दिया. इस कारण मंदिर की दिशा पश्चिम और दक्षिण की ओर बदल गई. जब दुर्योधन सुबह उठे और मंदिर की दिशा देखी, तो वह हैरान रह गए. यह मंदिर आज भी अपने अनोखे स्थापत्य के लिए प्रसिद्ध है, क्योंकि यह एकमात्र ऐसा मंदिर है जिसकी दिशा पश्चिम और दक्षिण में है.
देशभर से श्रद्धालु इस गांव में आते हैं
बरसी गांव का नाम भी एक रोचक कहानी से जुड़ा है. महाभारत युद्ध के दौरान श्री कृष्ण जब इस गांव में आए थे, तो उन्होंने इस गांव की तुलना बृज से की थी. इसके बाद से इस गांव का नाम बरसी पड़ा. आज भी शिवरात्रि और सावन के महीने में देशभर से श्रद्धालु इस गांव में आते हैं और भगवान भोलेनाथ का अभिषेक करते हैं.
नहीं होती होलिका दहन
बरसी गांव में एक और विशेष परंपरा है, जिसे जानकर आप हैरान हो जाएंगे. यहां के लोग होलिका दहन नहीं करते. इसके पीछे एक मान्यता है कि होलिका दहन करने से यहां की ज़मीन गर्म हो जाती है, और गर्म ज़मीन पर महादेव कैसे चल सकते हैं. इस कारण यहां के ग्रामीण होलिका दहन नहीं करते, जो एक अनूठी परंपरा है. बरसी महादेव मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसकी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व भी बहुत बड़ा है. यहां आने वाले श्रद्धालु इसे एक पवित्र स्थान मानते हैं, और हर साल शिवरात्रि पर यहां की रौनक और भी बढ़ जाती है.
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