रेल किराया बढ़ोतरी पर भड़कीं मायावती
लखनऊ। बसपा प्रमुख मायावती ने कहा है कि केंद्र सरकार को रेल के किराए में बढ़ोतरी के बारे में पुनर्विचार करना चाहिए। रेल का किराया बढ़ाने का निर्णय लोकहित में नहीं है। उन्होंने इसे केंद्र सरकार का व्यावसायिक फैसला करार दिया है। साथ ही कहा है कि जीएसटी की तरह ही सरकार रेल का किराया बढ़ाकर आम लोगों का शोषण कर रही है।
मंगलवार को बसपा मुख्यालय में उन्होंने कहा कि देश में महंगाई, बेरोजगारी से लोग परेशान हैं। रोजगार की तलाश में गरीब अपना घर छोड़ कर दूसरे राज्यों में जा रहे हैं।
करोड़ों लोग पर्यटन या अपने आनंद के लिए रेल का सफर नहीं कर रहे हैं, बल्कि रोजगार व रोजी-रोटी की मजबूरी में रेल का सफर कर रहे हैं। रेल का किराया बढ़ाने से गरीबों का हित प्रभावित होगा। केंद्र सरकार को चंद अमीरों की चिंता करने की बजाय गरीबों की चिंता करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि आज देश के हालात यह हो चुके हैं कि 95 करोड़ गरीब सरकारी योजनाओं पर निर्भर हो चुके हैं। यह संख्या वर्तमान आबादी का लगभग 64.3 प्रतिशत है, जबकि 2016 में इनकी संख्या 22 प्रतिशत थी। बसपा प्रमुख ने दिल्ली सरकार से ट्रांसपोर्ट व्यवसाय से जुड़े लोगों को राहत देने की मांग की है।
कहा है कि न्यायालय के आदेश की आड़ में सरकार प्रदूषण का हवाला देकर गरीबों की झुग्गियां उजाड़ रही है। उन्होंने कहा कि झुग्गियां उजाड़ने से पहले सरकार को गरीबों को बसाने की व्यवस्था करनी चाहिए। प्रदूषण नियंत्रण के अन्य उपायों पर काम किया जाना चाहिए जिससे गरीबों के रहने व खाने का अधिकार भी न छिने।
उन्होंने महंगाई को लेकर सरकार को घेरा है। साथ ही कहा है कि देश में बिजली की कमी है। बिजली को लेकर सरकार लोगों को संतुष्ट नहीं कर पा रही है। उन्होंने कहा कि नीतियों में कमी का परिणाम है कि सरकार दिल्ली व उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में बिजली का निजीकरण कर रही है। उन्होंने सलाह दी कि बिजली का निजीकरण करने की बजाय सरकार को किसी और विकल्प पर ध्यान देना चाहिए।
बिजली उपभोक्ताओं को आवेदन करने की जरूरत नहीं, नई व्यवस्था लागू
EVM और चुनाव प्रक्रिया पर Gaurav Gogoi ने उठाए सवाल
भीषण गर्मी में राहत: सुखबासुपारा में नलकूप खनन से दूर हुई पेयजल समस्या, ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री का जताया आभार
Iran का 30 दिन का शांति प्रस्ताव—सुलह या नई चाल?
Delhi-NCR में बारिश और ओलावृष्टि, अचानक बदला मौसम का मिजाज
