डॉक्टर भी देते हैं सलाह, पेट खराब में खाएं सादी खिचड़ी
भीषण गर्मी में बिगड़ रहा है हाजमा? राहत के लिए रामबाण है 'सादी खिचड़ी'
गर्मियों का बढ़ता पारा अपने साथ स्वास्थ्य संबंधी कई चुनौतियां लेकर आता है, जिनमें सबसे प्रमुख है पाचन तंत्र का बिगड़ना। तेज धूप, डिहाइड्रेशन और खान-पान में लापरवाही के कारण अक्सर भूख कम लगना, पेट दर्द, गैस और उल्टी-दस्त जैसी समस्याएं सामने आने लगती हैं। ऐसे में भारी और मसालेदार भोजन स्थिति को और गंभीर बना सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ और आयुर्वेद, दोनों ही इस दौरान शरीर को आराम देने के लिए हल्के और सुपाच्य भोजन की सलाह देते हैं।
क्यों है 'सादी खिचड़ी' सबसे बेहतर विकल्प?
जब पेट संवेदनशील हो, तो उसे ऐसे पोषण की आवश्यकता होती है जिसे पचाने में ऊर्जा कम लगे। सादी खिचड़ी एक आदर्श विकल्प है क्योंकि:
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पाचन में आसान: दाल और चावल का यह मेल आंतों पर दबाव नहीं डालता।
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पोषक तत्वों से भरपूर: यह शरीर को बिना भारीपन महसूस कराए जरूरी एनर्जी और प्रोटीन देती है।
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हाइड्रेशन: यह शरीर में पानी की कमी को रोकने और पाचन तंत्र को धीरे-धीरे रिकवर करने में मदद करती है।
खिचड़ी बनाने की सबसे सरल विधि
एक स्वस्थ और स्वादिष्ट खिचड़ी तैयार करने के लिए:
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एक कप चावल और आधा कप मूंग दाल लेकर अच्छी तरह धो लें।
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इन्हें प्रेशर कुकर में डालकर आवश्यकतानुसार पानी, चुटकी भर हल्दी और स्वादानुसार नमक मिलाएं।
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3-4 सीटी आने तक पकाएं ताकि यह पूरी तरह नरम हो जाए।
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परोसते समय ऊपर से हल्का सा घी डालना इसके स्वाद और गुणों को बढ़ा देता है।
सेहत के लिए मुख्य लाभ
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सूजन में कमी: यह पेट की अंदरूनी सूजन को शांत करती है।
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कमजोरी से राहत: इसमें मौजूद कार्बोहाइड्रेट शरीर की थकान दूर करते हैं।
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संतुलित आहार: दही या छाछ के साथ इसका सेवन प्रोबायोटिक्स की कमी को पूरा करता है।
इन बातों का रखें विशेष ध्यान
बीमारी के दौरान खिचड़ी को ताजा और गर्म ही खाएं। दिन में 2-3 बार थोड़ी-थोड़ी मात्रा में इसका सेवन करना फायदेमंद रहता है। रिकवरी के दौरान बाहर के जंक फूड, अधिक मिर्च-मसाले और अत्यधिक ठंडे पेय पदार्थों से सख्त परहेज करें। पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं और शरीर को भरपूर आराम दें।
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