गड्ढे में फंसा बेबी एलिफेंट, झुंड भी नहीं निकाल पाया बाहर; ग्रामीणों ने ऐसे किया रेस्क्यू
गुवाहाटी। असम के काजीरंगा स्थित सेकनी टी एस्टेट के एक चाय बागान में चार सप्ताह का एक मासूम हाथी का बच्चा कीचड़ से भरे गड्ढे में गिर गया था। बच्चे की चीख सुनकर पहुंचे उसके झुंड ने उसे बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन गहरे कीचड़ के कारण वे नाकाम रहे। इसके बाद ग्रामीणों की सूचना पर वन विभाग और वन्यजीव विशेषज्ञों की टीम ने मौके पर पहुंचकर एक सफल हाई-वोल्टेज रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया।
तेज और सतर्क एक्शन से ब बची जान
घटना की जानकारी मिलते ही 'सेंटर फॉर वाइल्डलाइफ रिहैबिलिटेशन एंड कंजर्वेशन' (CWRC) की टीम वन्यजीव पशु चिकित्सक डॉ. भास्कर चौधरी के नेतृत्व में तुरंत मौके पर पहुंची। बेहद सावधानी से चलाए गए अभियान के बाद नन्हे हाथी को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। अत्यधिक थकान और डिहाइड्रेशन की स्थिति को देखते हुए उसे तुरंत नजदीकी बीट ऑफिस ले जाया गया, जहां उसे जरूरी इमरजेंसी ट्रीटमेंट और फ्लूइड्स दिए गए।
परिवार से मिलाने का प्रयास और प्लान-बी
वन विभाग की पहली प्राथमिकता यह थी कि इस छोटे से हाथी के बच्चे को उसकी मां और झुंड से दोबारा मिलाया जाए। अधिकारियों ने पूरे दिन इलाके में नजर रखी और हाथियों के झुंड के लौटने का इंतजार किया, लेकिन जब वे वापस नहीं लौटे तो सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बच्चे को सीडब्ल्यूआरसी सेंटर शिफ्ट कर दिया गया।
असम के वन मंत्री जयंत मल्ला बरुआ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर इस सफल रेस्क्यू की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि यह नन्हा मेहमान अब सेंटर में दूसरे रेस्क्यू किए गए हाथियों के साथ पूरी तरह सुरक्षित और स्वस्थ है। साथ ही, उन्होंने स्थानीय ग्रामीणों और टी-गार्डन के वर्करों की सतर्कता की जमकर सराहना की, जिनकी सूझबूझ से इस बेजुबान की जान बचाई जा सकी।
राशिफल 14 सितम्बर 2026: जानिए आज का दिन आपके लिए कैसा रहेगा
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बेमेतरा जिले को दी 183 करोड़ के विकास कार्यों की सौगात
रायगढ़ के रामलीला मैदान में 14 से 23 सितंबर तक सजेगा चक्रधर समारोह का भव्य मंच
कठिनाईयों और संघर्ष के बावजूद अपनी पहचान और गौरव को बनायें रखने वाले सिंधी समाज पर सभी को गर्व : मुख्यमंत्री डॉ. यादव
राष्ट्रीय पर्यटन मंच पर छत्तीसगढ़ की गूंज, देश-दुनिया के सामने खुली पर्यटन संभावनाओं की नई राह
