डॉक्टरों की बड़ी उपलब्धि: रोबोटिक स्प्लीनो-रीनल बायपास से बची महिला की इकलौती किडनी
नई दिल्ली: देश में पहली बार हुई रोबोटिक स्प्लीनोरीनल बायपास सर्जरी; मैक्स अस्पताल के डॉक्टरों ने महिला को दिया नया जीवन
चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में भारत ने एक और बड़ी और ऐतिहासिक कामयाबी हासिल की है। देश की राजधानी दिल्ली के साकेत स्थित मैक्स सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के डॉक्टरों ने लखनऊ की रहने वाली एक 67 वर्षीय बुजुर्ग महिला की अत्यंत जटिल 'रोबोट असिस्टेड स्प्लीनोरीनल बायपास सर्जरी' को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। सर्जरी करने वाली विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम का दावा है कि आधुनिक रोबोटिक तकनीक के माध्यम से की गई यह भारत की सबसे पहली स्प्लीनोरीनल बायपास सर्जरी है।
एक ही किडनी पर जी रही थीं महिला, रीनल आर्टरी सिकुड़ने से बढ़ा खतरा
अस्पताल प्रबंधन द्वारा जारी किए गए आधिकारिक बयान के अनुसार, लखनऊ निवासी 67 वर्षीय मरीज लता सक्सेना की दाहिनी किडनी पहले ही किसी अन्य बीमारी के चलते निकाली जा चुकी थी। वे केवल अपनी बायीं किडनी के सहारे ही जीवन जी रही थीं। हाल ही में जब उनकी तबीयत बिगड़ी और जांच की गई, तो पता चला कि उनकी एकमात्र बची हुई बायीं किडनी तक शुद्ध खून पहुंचाने वाली मुख्य धमनी (रीनल आर्टरी) में बेहद गंभीर सिकुड़न आ गई है, जिससे किडनी फेल होने का बड़ा खतरा मंडरा रहा था।
तीन-तीन दवाओं के बाद भी बेकाबू था ब्लड प्रेशर
धमनी में आई इस रुकावट के कारण मरीज का ब्लड प्रेशर (बीपी) खतरनाक स्तर तक लगातार बढ़ा हुआ था। स्थिति इतनी गंभीर थी कि रोजाना तीन तेज दवाएं लेने के बावजूद भी उनका ब्लड प्रेशर काबू में नहीं आ रहा था। इस जटिल और जीवन रक्षक चुनौती को देखते हुए मैक्स अस्पताल के 'यूरोलॉजी, रीनल ट्रांसप्लांट, रोबोटिक्स एंड यूरो-ऑन्कोलॉजी' विभाग के चेयरमैन डॉ. अनंत कुमार के नेतृत्व में डॉक्टरों की एक विशेष टीम गठित की गई। डॉक्टरों ने सूझबूझ दिखाते हुए मरीज की स्प्लेनिक आर्टरी को रीनल आर्टरी से जोड़कर किडनी तक होने वाले ब्लड सर्कुलेशन को दोबारा चालू करने का फैसला किया।
रोबोटिक तकनीक का कमाल; बिना बड़े चीरे के मिली शत-प्रतिशत सफलता
चिकित्सकों के मुताबिक, यह एक अत्यंत जटिल और बारीक वैस्कुलर (रक्त वाहिका) प्रक्रिया थी। पारंपरिक सर्जरी के बजाय डॉक्टरों ने इसमें अत्याधुनिक रोबोटिक तकनीक का इस्तेमाल किया। रोबोटिक आर्म्स की मदद से डॉक्टरों ने बेहद सूक्ष्मता और सटीकता के साथ न्यूनतम चीरे (मिनिमल इनवेसिव) के जरिए इस ऑपरेशन को सफल बनाया। रोबोटिक तकनीक के कारण मरीज के शरीर को ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचा और खून का बहाव भी बेहद कम हुआ।
ऑपरेशन के बाद बीपी हुआ नॉर्मल, ठीक से काम करने लगी किडनी
इस ऐतिहासिक और सफल ऑपरेशन के तुरंत बाद ही मरीज की सेहत में चमत्कारी सुधार देखने को मिला है। डॉक्टरों ने बताया कि सर्जरी पूरी होते ही महिला का ब्लड प्रेशर पूरी तरह नियंत्रित और सामान्य हो गया है। इसके साथ ही, ऑपरेशन के बाद किए गए रीनल स्कैन की रिपोर्ट में यह पुष्टि हुई है कि उनकी एकमात्र काम कर रही बायीं किडनी तक अब बिल्कुल स्वस्थ और पर्याप्त मात्रा में रक्त प्रवाह (ब्लड फ्लो) शुरू हो चुका है। मरीज की हालत अब पूरी तरह खतरे से बाहर और स्थिर है।
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