ISRO Satellite Report: 15 साल में जंगलों का भारी नुकसान, चौंकाने वाले आंकड़े
रायपुर: छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में स्थित उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में पिछले 15 सालों से पेड़ों के कत्लेआम की एक ऐसी पटकथा लिखी जा रही थी, जिसका खुलासा अब ISRO के कार्टोसैट सैटेलाइट ने किया है। सैटेलाइट इमेजरी और हाई-रेजोल्यूशन ड्रोन सर्वे ने यह साबित कर दिया है कि यहां करीब 106 हेक्टेयर (265 एकड़) कोर फॉरेस्ट लैंड पर अवैध कब्जा किया गया और इस दौरान 1 लाख से ज्यादा बेशकीमती पेड़ों को बलि चढ़ा दिया गया।
2008 से 2022 तक बरबादी की टाइमलाइन
डिप्टी डायरेक्टर वरुण जैन के नेतृत्व में जब साल 2008, 2010, 2012 और 2022 के सैटेलाइट डेटा का मिलान किया गया, तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। साल 2011 में जहां अतिक्रमण महज 45 हेक्टेयर था, वह 2022 तक बढ़कर 106 हेक्टेयर हो गया। सबसे डरावना तथ्य यह है कि जिस जंगल में प्रति हेक्टेयर 1000 पेड़ हुआ करते थे, वहां अब केवल 25 से 50 पेड़ ही बचे हैं। भू-माफियाओं ने खेती के लिए साल के विशाल पेड़ों को व्यवस्थित तरीके से काटा और सबूत मिटाने के लिए उनके ठूंठ तक जला दिए।
तकनीक ने पकड़ी 10 सेमी की बारीकी
अधिकारियों के मुताबिक, इसरो की हाई-रेजोल्यूशन तस्वीरों ने इतनी स्पष्टता दी कि जमीन पर पड़े पेड़ों के ठूंठ और अतिक्रमणकारियों के खेतों की मेढ़ तक साफ़ नजर आने लगी। जांच में पाया गया कि जैतपुरी गांव के 166 अतिक्रमणकारियों ने सीतानदी रेंज की जमीन कब्जाई है, जबकि उनके पास पहले से ही रेवेन्यू एरिया में अपनी जमीनें मौजूद हैं।
पारिस्थितिकी तंत्र पर गहरा संकट
यह केवल पेड़ों की कटाई नहीं है, बल्कि एक पूरे ईको-सिस्टम की हत्या है। सीतानदी का यह बेल्ट महानदी का कैचमेंट एरिया है और हाथियों, तेंदुओं व बाघों का मुख्य रहवास है। पेड़ों की कटाई से न केवल वन्यजीवों का घर छिना है, बल्कि इससे मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ने का खतरा भी पैदा हो गया है।
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